April 14, 2026
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सूर्य ग्रहण के साए में होगी नवरात्र घटस्थापना, जानें शुभ मुहूर्त

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हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। इस पावन पर्व पर भक्त माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं। इस बार नवरात्र की शुरुआत एक विशेष खगोलीय संयोग के बीच हो रही है क्योंकि सूर्य ग्रहण के साए में घटस्थापना होगी। ऐसे दुर्लभ संयोग में भक्तों के मन में कई सवाल उठते हैं—क्या ग्रहण काल में घटस्थापना करना उचित है? सही शुभ मुहूर्त कब रहेगा? आइए जानते हैं इस विषय से जुड़ी संपूर्ण जानकारी।

नवरात्र का महत्व

नवरात्र में माता दुर्गा की आराधना कर भक्त अपने जीवन से नकारात्मकता को दूर करने और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इन नौ दिनों में भक्त व्रत रखते हैं, कलश स्थापना करते हैं और माता की चौकी सजाकर प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। घटस्थापना को नवरात्र का सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना जाता है, क्योंकि इसी से पूरे उत्सव की शुरुआत होती है।

इस बार क्यों खास है नवरात्र?

साल 2025 के शारदीय नवरात्र की शुरुआत एक अद्भुत संयोग के साथ हो रही है। नवरात्र का पहला दिन सूर्य ग्रहण के समय पड़ रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण काल में किसी भी धार्मिक कार्य, विशेषकर पूजन और स्थापना, को निषेध माना जाता है। ऐसे में घटस्थापना के लिए ग्रहण के बाद का समय शुभ माना जा रहा है।

सूर्य ग्रहण का प्रभाव

ग्रहण का धार्मिक दृष्टिकोण से बड़ा महत्व है। इस दौरान मंदिरों के द्वार बंद कर दिए जाते हैं और कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता। ग्रहण काल में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है, इसलिए पूजा-पाठ वर्जित रहता है।

  • ग्रहण से पहले सूतक काल लगता है, जिसमें धार्मिक कार्य नहीं होते।

  • ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है।

  • घटस्थापना ग्रहण समाप्ति के बाद शुभ मुहूर्त में ही करनी चाहिए।

नवरात्र घटस्थापना शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार घटस्थापना का कार्य ग्रहण समाप्ति के बाद ही किया जाएगा।

  • नवरात्र प्रारंभ तिथि: सोमवार 22 सितंबर और रात 01 बजकर 23 मिनट

  • सूर्य ग्रहण का समय: 21 सितंबर रात 11 बजे होगी, समापन 22 सितंबर की सुबह 3 बजकर 23 मिनट

  • घटस्थापना का शुभ मुहूर्त: शुभ मुहूर्त सुबह 6:09 बजे से 8:06 बजे , अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक!

इस समय के बाद कलश स्थापना, दुर्गा पूजन और व्रत का संकल्प लेना श्रेष्ठ रहेगा।

घटस्थापना की विधि

  1. सबसे पहले पूजा स्थान को शुद्ध जल से साफ करें।

  2. मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और उसमें जल से भरा कलश स्थापित करें।

  3. कलश पर आम के पत्ते लगाकर नारियल रखें।

  4. माता दुर्गा की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाएं।

  5. ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करते हुए घटस्थापना करें।

सूर्य ग्रहण और नवरात्र का संगम: शुभ या अशुभ?

ग्रहण के समय नवरात्र का आरंभ होना कई लोगों को असमंजस में डाल सकता है। शास्त्रों के अनुसार, ग्रहण के दौरान पूजा न करके ग्रहण समाप्ति के बाद श्रद्धा और नियमों से पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। यह संयोग भक्तों के लिए एक तरह से परीक्षा की तरह है, जिसमें संयम और श्रद्धा का पालन करना आवश्यक है।

भक्तों के लिए विशेष सुझाव

  • घटस्थापना केवल ग्रहण समाप्ति के बाद ही करें।

  • ग्रहण के दौरान मंदिर और पूजा स्थान बंद रखें।

  • ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें।

  • मां दुर्गा की आराधना पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान से करें।

  • व्रतधारियों को ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए।

निष्कर्ष

साल 2025 का शारदीय नवरात्र अत्यंत खास होने वाला है क्योंकि इसकी शुरुआत सूर्य ग्रहण के साए में हो रही है। ऐसे दुर्लभ संयोग में भक्तों को सावधानीपूर्वक धार्मिक नियमों का पालन करना चाहिए। ग्रहण समाप्ति के बाद किए गए पूजन और घटस्थापना से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होगी। सही मुहूर्त और विधि से घटस्थापना करने पर नवरात्र व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है।

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