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October 23, 2026
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जानें कब से शुरू हो रहा है सावन महीना और क्या हैं व्रत नियम

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सावन का महीना हिन्दू धर्म में विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान शिवभक्त विशेष श्रद्धा, भक्ति और व्रत के साथ शिव पूजन करते हैं। वर्ष 2025 में सावन का महीना कब शुरू हो रहा है? क्या हैं इसके व्रत और पूजा के नियम? आइए जानते हैं इस खास अवसर की संपूर्ण जानकारी।

सावन माह का धार्मिक महत्व

हिन्दू पंचांग के अनुसार, सावन मास (श्रावण मास) वर्ष का पांचवां महीना होता है। यह महीना वर्षा ऋतु में आता है और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की उपासना का विशेष महत्व होता है। शिवलिंग पर जलाभिषेक, बेलपत्र चढ़ाना, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप और व्रत-उपवास करने से भक्तों को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

मान्यता है कि इसी माह में माता पार्वती ने कठोर तप कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसलिए यह महीना शिव-पार्वती के विवाह और समर्पण की भावना का भी प्रतीक है।

सावन 2025 कब से शुरू हो रहा है?

वर्ष 2025 में सावन का महीना 14 जुलाई 2025 (सोमवार) से शुरू होकर 11 अगस्त 2025 (सोमवार) तक रहेगा। इस बार सावन माह में कुल 5 सोमवार होंगे, जो इस प्रकार हैं:

1. पहला सोमवार व्रत – 14 जुलाई 2025
2. दूसरा सोमवार व्रत – 21 जुलाई 2025
3. तीसरा सोमवार व्रत – 28 जुलाई 2025
4. चौथा सोमवार व्रत – 4 अगस्त 2025
5. पाँचवाँ सोमवार व्रत – 11 अगस्त 2025

इस बार सावन पूरे 29 दिन का होगा, जो भक्तों के लिए बेहद शुभ माना जा रहा है।

सावन सोमवार व्रत का महत्व

सावन सोमवार व्रत विशेष रूप से कुंवारी कन्याओं और विवाहित स्त्रियों द्वारा किया जाता है। कुंवारी कन्याएं इस व्रत को उत्तम वर की प्राप्ति के लिए करती हैं, जबकि विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए इस व्रत का पालन करती हैं। इसके अलावा पुरुष भी इस व्रत को रखते हैं ताकि जीवन में शांति, संतुलन और समृद्धि बनी रहे। यह व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का उत्तम साधन माना जाता है।

सावन व्रत और पूजन के नियम

सावन माह में पूजा-पाठ और व्रत करने के कुछ विशेष नियम होते हैं जिनका पालन करने से मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं:

1. प्रात:काल स्नान : सावन सोमवार व्रत वाले दिन प्रात:काल जल्दी उठकर स्नान कर लें। स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का ध्यान करें।

2. व्रत का संकल्प लें : भगवान शिव के सामने दीप जलाकर व्रत का संकल्प लें। “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग का जलाभिषेक करें।

3. शिवलिंग पर अर्पण करें यह सामग्री: गंगाजल या शुद्ध जल, बेलपत्र (तीन पत्तों वाला), सफेद फूल, भस्म (राख), धतूरा और आक का फूल
शहद, दूध, दही, घी, शक्कर !

4. भोजन नियम :  व्रत के दिन एक समय फलाहार करें या निर्जल उपवास रखें। यदि स्वास्थ्य अनुकूल न हो तो फल, दूध या एक समय का सात्विक भोजन कर सकते हैं।

5. सोमवार की कथा और आरती : शिव पुराण में वर्णित सोमवार व्रत कथा का पाठ करें और “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे” महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। दिन के अंत में भगवान शिव की आरती करें।

सावन में क्या न करें? (वर्जित कार्य)

1. सावन में तामसिक भोजन जैसे मांस, मछली, अंडा और शराब का सेवन न करें।
2. नीले और काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें।
3. बेलपत्र को टूटे पत्ते या कीड़ों वाला न चढ़ाएं।
4. शिवलिंग पर तुलसी पत्र न चढ़ाएं – यह वर्जित है।

शिव भक्ति से मिलने वाले लाभ

सावन माह में सच्चे मन से की गई शिव भक्ति के अनेक लाभ होते हैं:
 
  •  मानसिक शांति और स्थिरता
  • आर्थिक समृद्धि और नौकरी में सफलता
  • वैवाहिक जीवन में सुख और सामंजस्य
  • रोगों से मुक्ति और लंबी आयु
  • आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति

निष्कर्ष

सावन का महीना शिव भक्ति का सर्वोत्तम समय होता है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। यदि आप इस सावन में व्रत और भक्ति के साथ भगवान शिव को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो ऊपर दिए गए नियमों का पालन करें और इस पुण्य मास का पूरा लाभ उठाएं।

इस वर्ष का सावन आपके जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लेकर आए — यही भगवान भोलेनाथ से कामना है।

हर हर महादेव!

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